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Description
उपनिषद् पढ़ना तो चाहते हैं पर शुरुआत कहाँ से करें? सर्वसार से करें! 108 उपनिषदों में यह उपनिषद् इसलिए प्रख्यात है क्योंकि इसमें सभी उपनिषदों का सार पाया जाता है। मात्र 21 श्लोकों में यह ग्रन्थ वैदिक ऋषियों के गूढ़ ज्ञान को अपने में समाय हुए है।
Index
CH1
शांतिपाठ-
CH2
बंधन क्या है? मुक्ति क्या है? (श्लोक १-२)
CH3
विद्या और अविद्या किसको कहते हैं? (श्लोक ३)
CH4
जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय - ये चार अवस्थाएँ क्या हैं? (श्लोक ४)
CH5
अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोशों का परिचय क्या है? (श्लोक ५)