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Description
आज से पचास-साठ साल पहले एक मानसिक रोगी को जितनी एंग्ज़ायटी (उत्कंठा) महसूस होती थी, उतनी आज एक सामान्य युवा को महसूस होती है।
मूल कारण क्या है?
दो मुख्य कारण हैं: 1. कृत्रिम उपभोक्तावाद 2. बोध का पतन
हर चीज़ की मांग हमारे मन में तैयार की जा रही है, हर चीज़ हम पा नहीं सकते, तो हम बहुत-बहुत निराश हो जाते हैं। वही निराशा फिर, एंग्ज़ायटी और डिप्रेशन के तौर पर सामने आती है। वही डिप्रेशन फिर आत्महत्या जैसे क़दमों की ओर बढ़ावा देता है।
आचार्य प्रशांत जी द्वारा किए गए ये संवाद इन मुख्य कारणों को गहराई से समझने और एक स्वस्थ जीवन जीने की ओर अग्रसर करते हैं।