गुरु बेचारा क्या करे

गुरु बेचारा क्या करे

शिष्यत्व, समर्पण, बोध
4.5/5
2 Ratings & 3 Reviews
Gifting available for eBook & Audiobook Add to cart and tap ‘Send as a Gift’
eBook Details
Hindi Language
Description
शुद्धतम रूप से गुरु बोध मात्र है।
आत्मज्ञान, आत्मविचार ही आत्मबोध बन सकता है।

आत्मविचार में जब तुम अपने आप को देखते हो, तभी संभव होता है गुरु का तुम्हारे लिए कुछ कर पाना।
जो स्वयं को देखने को राज़ी नहीं, गुरु उसके लिए कुछ नहीं कर पाएगा।

गुरु ही प्रेरणा देता है आत्मविचार की, और आत्मविचार का आखिरी फल होता है आत्मबोध–यानि गुरु की प्राप्ति।

गुरु से ही आदि, गुरु पर ही अंत; गुरु ही है आत्मा अनंत।
Index
CH1
जीवित गुरु खतरनाक क्यों?
CH2
दुनिया में इतने कम कबीर क्यों?
CH3
गुरु की पहचान क्या?
CH4
गुरु वो जो तुम्हें घर भेज दे
CH5
गुरु तुम्हें वो याद दिलाता है जो तुम जानते ही हो
CH6
गुरु तुम्हारी बीमारी के कारणों का कारण जाने
Select Format
Share this book
Have you benefited from Acharya Prashant's teachings? Only through your contribution will this mission move forward.
Reader Reviews
4.5/5
2 Ratings & 3 Reviews
5 stars 50%
4 stars 50%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%