दशानन

दशानन

दस चेहरे अहम् के
4.3/5
3 Ratings & 1 Reviews
Gifting available for eBook & Audiobook Add to cart and tap ‘Send as a Gift’
eBook Details
Hindi Language
Description
रावण कौन? रावण वो जिसका 'अह्म' अपनी वृत्तियों पर चले। दस सर प्रतीक हैं हमारे खण्डित मन और वृत्तियों के, जिनके हम गुलाम हैं।

रावण वो जो अपनी वृत्तियों और वासनाओ पर चले। राम वह जिसका 'अह्म' सत्य और शांति को समर्पित रहे।

हमारे अंदर ही राम होने की संभावना है और रावण होने की भी। रावण होना प्रकृति है हमारी, राम होने के लिए सत्य और शांति के प्रति अगाध प्रेम चाहिए।

कठिन है अपने भीतर के रावण को हराना क्योंकि हम जन्म से शारीरिक और मानसिक वृत्तियों पर चलते हैं, पर यह दशहरा मौका है अपने भीतर के छुपे रावण को समझने का और अपने भीतर के राम के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने का।

अपने भीतर के 'अह्म' रूपी रावण को समझें आचार्य प्रशान्त की इस पुस्तक के माध्यम से।
Index
CH1
अहंकार पर चोट लगने पर भी स्थिर कैसे रहें?
CH2
अहंकार क्या है, और उसका शरीर से क्या सम्बन्ध है?
CH3
छल-कपट को कैसे पहचानें?
CH4
अहम् वृत्ति और शरीर
CH5
अहंकार मिटाने के लिए क्या करना चाहिए?
CH6
क्या अहम् की कोई सत्ता नहीं है?
Select Format
Share this book
Have you benefited from Acharya Prashant's teachings? Only through your contribution will this mission move forward.
Reader Reviews
4.3/5
3 Ratings & 1 Reviews
5 stars 33%
4 stars 66%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%